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Editorial

सोचिए ज्ञानवापी के महंत पन्ना शिवलिंग को लेकर कुएं में क्यों कूद गए होंगे?

ज्ञानवापी के महंत पन्ना को क्या मालूम था कि जिस शिवलिंग के रक्षार्थ वे शिवलिंग लेकर ज्ञानवापी कूप में कूद रहे हैं, उस पर ईमानवाले सदियों वजू करेंगे। ये मजहबी क्रूरता का नग्न सत्य है जिसे आज…

औरंगज़ेब ने जब मंदिर तोड़ा था तब बहुत सारे वाइरस सुबूत के तौर पर छोड़ दिए

काशी विश्वनाथ मंदिर भग्न करते समय जो सबूत छोड़े गए जैसे पुराने मंदिर की दीवार पर ही गुंबद खड़ा कर देना, नंदी की मूर्ति अक्षुण्ण रहना और ज्ञानवापी में भग्न मंदिर के अवशेष और अब वजू करने की…

उनको डर क्यों लग रहा है ?

व्यभिचारी, अत्याचारी, डकैत अकबर को इतिहास की किताबों में ग्रेट मुगल लिखा गया। 800 साल तक पढ़ाई लिखाई का एक भी केंद्र नहीं बनाने वाले, प्राचीन शिक्षा केंद्रों को जलाने वाले उन अनपढ़ ,गंवार…

क्या काशी में नंदी महाराज की अपने आराध्य महादेव के प्रत्यक्ष दर्शन की प्रतीक्षा शीघ्र…

औरगज़ेब के इसी फरमान या कहिये आदेश पर ही #बनारस के #काशी_विश्वनाथ_मंदिर और #मथुरा_का_केशव_राय_मंदिर तुड़वाया गया था। इसके बावजूद भी मुसलमान औरगज़ेब को अपना #हीरो मानता है.

क्या भारत आज ताजमहल के गर्भगृह से सत्य को छान सकता है ?

कल्पना कीजिए आपके घर-मंदिर में कोई डेड बॉडी लेकर पहुंच जाता है। गर्भ गृह में उस डेड बॉडी को लेकर दफनाया जाने लगता है। आप को कितनी तकलीफ होगी, कितना दर्द होगा!

औरंगजेब आक्रांता था या आदर्श ? उत्तर जानकर आप हैरत में क्यो पड़ जाएंगे?

औरंगजेब से लेकर बुरहान बानी तक जैसे आतंकियों के लिए ईमान वालों के मन में सम्मान स्वाभाविक बात है। पर इसमें सबसे नई बात यह है कि ये बात अब खुलकर सामने आने लगी है।

आखिर कहाँ खो गए भारत के ७ लाख ३२ हज़ार गुरुकुल एवं विज्ञान की २० से अधिक शाखाएं ?

“दुर्भाग्य है कि भारत में हम अपने श्रेष्ठतम सृजनात्मक पुरुषों को भूल चुके है। इसका कारण विदेशियत का प्रभाव और अपने बारे में हीनता बोध की मानसिक ग्रंथि से देश के बुद्धिमान लोग ग्रस्त है” –…

ओवैसी ने क्यों कहा बाबरी शहीद हो गया अब हम और कोई दूसरी शहादत नहीं दे सकते ?

गजनबी और गोरी से लेकर औरंगजेब तक ने एक बार नहीं चार बार काशी को तोड़ा। हमने कभी बदला नहीं लिया। गजनबी से शुरू हुआ यह सिलसिला सुल्तानों ने बार-बार तुड़वाया, सनातन धर्मियों ने अपने सामर्थ्य से…

कश्मीर में सेना भी मार रही एक के बदले 10 हमलावर

कश्मीरी पंडितों की हत्या अगर होती है तो क्या उन विपक्षियों का मुंह मे दही जमाये बैठ जाना सही है? क्या उन्हें कश्मीरी पंडितों का हौसला बढ़ाने आगे नही आना चाहिए? यहा तो विपक्ष की भूमिका लगती है…