

Positive India: साभार ओ पी चौधरी फेसबुक: परसों 7 अप्रैल 2019 को सुबह मैं उठा दंतेवाड़ा में । एक दिन पहले ही भीमा मंडावी जी ने कहा था कि सुबह साथ में ही नाश्ता करेंगे।सुबह उठ कर तैयार होकर उनके घर गया। वही निश्छल मुस्कान,दिल जीत लेने वाली आत्मीयता के साथ मुलाकात;पूरे परिवार और बच्चों के साथ भी मिलना;आदिवासी संस्कृति के साथ स्वागत। वहीं अनेक लोगों की उपस्थिति में राजनैतिक योजना बनाना।’मोदीजी को इस बार भी पी एम बनाना ही है भाई साहब”-कहना। उत्साह के साथ जल्दी जल्दी घर से निकलने की तैयारी। आखिरी में कहना मेरी बेटी को भी अच्छे से पढ़ाना है साहब!-कहना।
वही निर्भीक अंदाज। सीधा किरंदुल पहुँचकर कार्यकर्ताओं के साथ बैठना,पदयात्रा,महत्त्वपूर्ण लोगों से मिलवाना-उनके साथ बिठवाना। फिर बचेली, फिर भांसी,अनेक जगह होते हुए बारसूर तक जाने की योजना। अनेक रूठों को मनाना। न जाने क्या क्या- केवल एक दिन में साथ साथ करते रहे।
11 साल पहले 30 वर्षीय एक ग्राम पंचायत सचिव ने नौकरी से इस्तीफा दिया था और सीधा चुनाव लड़ा था कांग्रेस के तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष बस्तर के टाइगर कहे जाने वाले महेंद्र कर्मा जी से । और उस 30 वर्षीय युवा ने अपनी जमीनी पकड़ से कर्मा जी जैसे दिग्गज नेता को हरा दिया था। इस बार फिर पूरे छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की लहर के बाद भी अपनी जमीनी पकड़ के कारण बस्तर से अकेले चुनाव जीतने में सफल रहे।
मेरे दंतेवाड़ा में कलेक्टर रहने के दौरान मैं एजुकेशन सिटी,लाइवलीहुड कॉलेज, छू लो आसमान जैसे सैकड़ों परियोजनाओं के निर्माण में उनके सकारात्मक राजनैतिक सोच को कभी भूल नही सकता। सत्ता धारी दल के विधायक होने के बावजूद अनावश्यक राजनैतिक हस्तक्षेप से बचना,बड़े दिल के साथ बस्तर के आदिवासी भाई बहनों के भविष्य की चिंता करना-ये थे 41 वर्षीय भीमा जी।
आज देख रहा हुँ जिस गाड़ी में पूरा दिन साथ साथ गये, वो पूरा क्षत-विक्षत है। जिन जाबांज जवानों ने साथ मे फ़ोटो ली-वो आज नही हैं। तमाम चीजों के साथ मैंने अपना एक जाबांज दोस्त आज खो दिया है। आपके इस दुनिया को अलविदा कहने से महज एक दिन पहले आपके साथ बिताए एक-एक पल मैं हमेशा संजो कर रखूँगा।बहुत याद आओगे भीमा जी 🙏…
7अप्रैल की एक तश्वीर…. जमीनी कार्यकर्त्ताओं के साथ.. .