
टीसीएस कांड की सरगना निदा खान जैसों से दूरी बनाना शुरू कीजिए
-सर्वेश कुमार तिवारी की कलम से-

Positive India:Sarvesh Kumar Tiwari:
संसार में कम से कम स्त्रियों से तो यह उम्मीद की ही जाती है कि उनके सामने किसी स्त्री की प्रतिष्ठा नहीं जाएगी। कहीं अकेले में भयभीत हुई युवती यदि किसी स्त्री को देख ले तो उसे बल मिलता है। स्कूल की प्रिंसिपल स्त्री हो तो लोग बेटियों का एडमिशन कराते हुए तनिक निश्चिंत हो जाते हैं। कंपनियों में यदि बॉस स्त्री हो तो लगता है कि उस ऑफिस में बेटियां सुरक्षित होंगी। कोई यदि ऐसा सोचता है तो वह गलत नहीं, अपराधी नहीं, ऐसा सोचना तो स्वाभाविक ही है। कम से कम स्त्रियों से तो स्त्री सुरक्षा की उम्मीद की ही जानी चाहिए न।
अब टीसीएस कांड की सरगना निदा खान के बारे में सोचिए, आपको भय होगा। निदा स्त्री हैं, उनसे लड़कियों के लिए करुणा की आशा तो की ही जा सकती थी। उनके पास काम करने में बच्चियों को सुरक्षा का भय नहीं होगा, इसकी उम्मीद तो की ही जा सकती थी। संभव है कुछ बच्चियों के माता पिता ने यह उम्मीद की भी हो…
पर नहीं। निदा ने बिल्कुल ही उलट व्यवहार किया। उसे स्त्री पुरुष याद नहीं रहा, उसे बस इतना याद रहा कि लड़कियां हिंदू हैं और उन्हें किसी भी तरह लूटना है। उनकी प्रतिष्ठा लूटनी है, उनका धर्म लूटना है, उनका धन लूटना है।
निदा खुद ही उन लड़कियों के प्रति अपने लड़कों को लगाती रहीं। अपने लड़कों को प्रेरित करती रही कि किसी तरह इन लड़कियों को फांसों, इनकी अश्लील तस्वीरें निकालो, इन्हें किसी भी तरह अपने कब्जे में करो…
निदा केवल एक महिला नहीं है। निदा व्यक्ति नहीं है, चरित्र है। वह अकेली भी नहीं, उसके जैसी औरतें हजारों हैं, लाखों हो सकती हैं… आप उन्हें रोक नहीं सकते क्योंकि वे अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित हैं। आज पकड़ी गई, कल छूटने के बाद भी यही करेगी। उसे इसपर लज्जा नहीं आएगी, क्योंकि अपने हिसाब से उसने कुछ बुरा किया ही नहीं। अपनी दृष्टि में तो वह पुण्य का काम कर रही है…
ऐसों से दूरी बनाना शुरू कीजिए। किसी भी बहाने उनके निकट जाएंगे तो वही होगा जो हुआ… सतर्क रहेंगे तो बचेंगे, भाईचारे की नौटंकी आपको लील जाएगी।
साभार :सर्वेश कुमार तिवारी-(यह लेखक के अपने विचार हैं)