
इंडियन सेक्युलर ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर बुक्का फाड़ के रो रहे हैं
-सतीश चंद्र मिश्रा की कलम से-

Positive India:Satish Chandra Mishra:
ग़ज़ब की बेशर्मी…
इस देश में खुद को सेक्युलर कहने वाले जानवर नस्ल के इंसान अब ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की मौत पर बुक्का फाड़ के रो रहे हैं, मातम कर रहे हैं।
इन बेशर्म सेक्युलरों की नंगई, नीचता और बर्बरता को बेनकाब करते हुए बस इतना याद दिलाना चाहूंगा कि, ये वही खामनेई है जो हिजबुल्लाह हमसे हूती और बोको हराम सरीखे इस्लामिक आतंकवादी संगठनों का फ्रेंड और फाइनेंसर था। इन आतंकी संगठनों को भरपूर रकम उपलब्ध कराता था। अपने यहां शरण और संरक्षण देता था। इसकी सांप्रदायिकता और गैर इस्लामी समुदाय के प्रति नफरत इतनी जहरीली और अंधी थी कि, जिन इस्लामिक आतंकी संगठनों को ये भरपूर मदद करता था वो सभी आतंकी संगठन शियाओं को अपना दुश्मन समझने वाले सुन्नी मुसलमान हैं। भारत पाक के बीच हुए 4 युद्धों में ईरान हमेशा पाकिस्तान के साथ खड़ा हुआ था। जबकि इज़राइल ने उन चारों युद्धों में भारत का खुलकर साथ दिया था।
इसके अलावा इसी खामनेई ने ईरान में साढ़े चार करोड़ से अधिक महिलाओं की बोराबंदी कर रखी थी। ईरान की साढ़े चार करोड़ से अधिक महिलाओं को हिजाब के नाम पर काले बोरे में बंद रहने को मजबूर कर रखा था।
इसी नरपिशाच खामनेई ने सितंबर 2022 में 22 वर्षीया महसा अमिनी की हत्या पुलिस हिरासत में भयंकर “टॉर्चर” कर के करवा दी थी। महसा अमिनी का दोष बस इतना था कि, 22 वर्ष की वह युवती खुद को हिजाब नाम के काले बोरे में बंद करने को तैयार नहीं हुई थीं। महसा अमिनी की मौत के बाद इसी नरपिशाच खामनेई ने सैकड़ों अन्य ईरानी युवतियों की हत्या सरेआम इसलिए करवा दी थी क्योंकि महसा अमिनी की तरह ही उन्होंने खुद को हिजाब नाम के काले बोरे में बंद करने से मना कर दिया था।
खामनेई नाम के इसी नरपिशाच ने 8 वर्ष की मासूम अबोध बच्ची के सामने उसके पिता को तेहरान के एक चौराहे पर फांसी पर लटकवाया था। इसके लिए खामनेई के जल्लाद उसकी 8 वर्षीया बेटी को जबरिया उसके घर से उठा कर उस चौराहे पर लाए थे जहां उसके पिता को फांसी दी जा रही थी।
ऐसा राक्षस बहुत पहले मर जाना चाहिए था। उसकी मौत में बहुत देर हो गयी।
लेकिन भारत के बर्बर बेशर्म सेक्युलर उस नरपिशाच खामनेई की मौत पर भी आंसू बहा रहे हैं, क्योंकि खामनेई मुसलमान था और भारत में इन सेक्युलरों का सबसे ठोस और सुरक्षित वोट बैंक मुसलमान ही हैं।
साभार: सतीश चंद्र मिश्रा-(यह लेखक के अपने विचार हैं)