
मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूँ मेरा, रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा
-सतीश चंद्र मिश्रा की कलम से-

Positive India:Satish Chandra Mishra:
भाई मनीष ठाकुर जी के शो और फेसबुक पर मेरी पोस्टों के सवालों के उत्तर में जवाब यह आ रहे हैं कि, तुम फलाने से ज्यादा जानते हो, तुम ढीकाने से ज्यादा जानते हो, क्या सारी अकल तुम्हारे पास ही है…. लेकिन एक भी उत्तर पिछले एक हफ्ते में ऐसा नहीं मिला जिसमें मेरे सवालों का जवाब हो…
ऐसे जवाबों को देखकर 15 साल पुरानी यादें ताज़ा हो रही हैं। उस समय धूर्त अन्ना और ठग जालसाज केजरीवाल की जोड़ी पर 2011 में ही मेरे सवालों के जवाब में उत्तर आते थे कि, एक 73 वर्ष का बूढ़ा और एक इनकम टैक्स कमिश्नर की नौकरी को लात मारकर देश सुधारने, संभालने निकले दो लोगों पर ऐसे सवाल उठाते हुए तुमको शर्म नहीं आ रही…. तुम उनसे ज्यादा जानते हो….
आज उस प्रकरण का नतीजा क्या निकला यह बताने की जरूरत नहीं। एक इशारा कर के इस पोस्ट को खत्म कर रहा हूं कि, उसी गिरोह के आधा दर्जन से अधिक सदस्य चोला बदलकर राष्ट्रवादी बन चुके हैं… एक दुर्दांत खालिस्तानी आतंकवादी के साथ केजरीवाल के गहरे संबंधों का गवाह स्वयं रहने के बावजूद केजरीवाल के साथ बना रहा जनलोकपाली गव्वैया भी तब वहां से भागा जब उसे राज्यसभा की सीट के बजाय केजरीवाल ने ठेंगा दिखाया। तब उस केजरीवाल की उस दुर्दांत खालिस्तानी आतंकवादी के साथ गहरे संबंधों की कहानी उसने सुनानी शुरू की। लेकिन आजतक यह नहीं बताया कि, एक दुर्दांत खालिस्तानी आतंकवादी के साथ केजरीवाल के संबंधों का निकटतम साक्षी बनने के बावजूद, उसके बाद भी वह केजरीवाल के अंडकोष पकड़ कर दो साल तक क्यों लटका रहा.?
आजकल वह जनलोकपाली गव्वैया 20 से 25 लाख रुपए की फीस लेकर रामकथा सुनाने का धंधा कर रहा है और UGC पर बिचारा इतना दुःखी हो गया है कि… उस की भी चीख निकल गयी है कि…
मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूँ मेरा, रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा ..।
काश उसके जैसा अभागा हर सवर्ण हो जाये😂। क्रमशः
श्रृंखला अभी तो शुरू हुई है… लंबी चलेगी। क्योंकि 19 मार्च तक का समय तो है ही…
(अन्ना गिरोह का उल्लेख इसलिए किया है कि, कांग्रेसी और मोदी विरोधी बंधुआ मजदूर निरर्थक मेरी पोस्टों पर दंड पेलने ना आये। मेरी सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
हां कठोरतम किंतु तार्किक तथ्यात्मक आलोचना का स्वागत है।)
साभार: सतीश चंद्र मिश्रा(यह लेखक के अपने विचार हैं)