
सत्ता की हुसियारी के नशे में चूर मोदी की भुजिया बनाने को तैयार खड़े हैं उन के वोटर
-दयानंद पांडेय की कलम से-

Positive India: Dayanand Pandey:
कोई माने या न माने पर यू जी सी एक्ट को ले कर भाजपा की मोदी सरकार ने अपनी कब्र खोद ली है । सारी बढ़त को गुड़ गोबर में तब्दील कर लिया है । अब आगे कुआं , पीछे खाई है । अब यह एक्ट वापस लेने पर दलित , ओ बी सी देश में आग लगा देंगे ।
सवर्ण आग तो नहीं लगा सकते पर बुद्धि तो लगा ही सकते हैं । लगाएँगे । पक्का लगाएँगे । फिर मोदी सरकार क्या करवट लेती है , देखना दिलचस्प होगा । आख़िर कब तक राहुल गांधी जैसे मूर्ख को सामने रख कर सवर्ण वोटर को मोदी सरकार ब्लैकमेल करती रहेगी । कि हम को हटाया तो राहुल आ जाएगा।
लोगों को क्या लगता है कि अविमुक्तेश्वरानंद के पक्ष में जो तमाम सवर्ण बरैया की तरह अफ़ना कर , तमतमा कर खड़े हो गए हैं , वह सचमुच अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हैं ?
एक नहीं हैं । लेकिन यू जी सी एक्ट का प्रेशर इतना ज़बरदस्त है कि सब इसी बहाने फूट पड़े हैं । ऐसे जैसे कोई फोड़ा फूट गया हो । मुट्ठी भींच कर , हाथ उठा कर लोग खड़े हो गए हैं । प्रेशर कुकर सीटी के अभाव में फट पड़ा है । आरक्षण 85 प्रतिशत करने की तैयारी साफ़ दिखती है । 2029 में मोदी के पास चुनाव जीतने के लिए 85 प्रतिशत आरक्षण के अलावा और कोई कार्ड रह भी नहीं गया है । यू जी सी तो जल में फेंका हुआ एक कंकड़ मात्र है । तैयारी आरक्षण का कोटा बढ़ाने की है । लेकिन वह कहते हैं न कि धोबी का कुत्ता न घर का , न घाट का ।
विश्वनाथ प्रताप सिंह की याद कीजिए । एक खल राजनीतिज्ञ शरद यादव उन का मुख्य सलाहकार बन गया । बता दिया कि मंडल लागू कीजिए । अंबेडकर से बड़े नेता बन जाएंगे आप । गांव-गांव आप की मूर्तियां लग जाएंगी । गांव-गांव मूर्तियां तो नहीं लगीं विश्वनाथ प्रताप सिंह की पर गालियां आज भी गांव-गांव से मिलती हैं । उन की राजपूत बिरादरी सब से ज़्यादा गाली देती है उन को । देश अगड़ा-पिछड़ा में बंट गया । नफ़रत की दीवार खड़ी हो गई बंटोगे तो कटोगे का नफ़रती नारा आ गया । यह वही विश्वनाथ प्रताप सिंह था जिस ने उत्तर प्रदेश का मुख्य मंत्री रहने पर मंडल मसले पर फ़ाइल में लिखा था कि अगर लागू किया तो आग लग जाएगी । फिर प्रधान मंत्री बन कर देश में आग लगा दी । लालू , मुलायम जैसे भ्रष्टाचारी और जातिवादी नेता खड़े कर दिए ।
कोढ़ में खाज यह कि विश्वनाथ प्रताप सिंह से आगे बढ़ कर कांग्रेस के अर्जुन सिंह ने नौकरियों से आगे जा कर एडमिशन में भी आरक्षण के ज़हर का तड़का दे दिया । परिणाम यह है कि अब बेस्ट फ़ेल्योर मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं ।
मोदी सरकार अब चाहती है कि सवर्ण पढ़ें भी नहीं । सो यू जी सी एक्ट की चादर बिछा दी है । यह एक नई मजार है । जिस पर जातीय सौदागर रोज चादर बिछायेंगे । चढ़ावा चढ़ाएंगे । मोदी बेटा इसी मजार के बूते फिर-फिर सरकार बनाएंगे । डराएंगे,राहुल गांधी जैसे मूर्ख का पुतला सामने रख कर कि वोट दो भाजपा को नहीं यह लतीफ़ा आ जाएगा।
मोदी का क्या है कि अपने भाषण में बताया कि भाजपा अध्यक्ष नीतिन नबीन हमारे बॉस हैं और हम कार्यकर्ता । दूसरे ही क्षण नबीन को साथ-साथ सीढ़ियाँ उतरते हुए हाथ पकड़ कर पीछे खड़ा कर दिया । हैसियत बताई कि बेटा भाषण में बॉस हो । हक़ीक़त में हमारे बग़ल बच्चा।
मोदी भाजपा वोटर को भी नितिन नबीन समझने की होशियारी में हैं । वह एक पुराना शेर है :
अपन मस्त हो कर देखा इस में मज़ा नहीं है
हुसियारी के बराबर कोई नशा नहीं है ।
मोदी इसी शेर के अब तलबगार हैं । फ़िलहाल बंगाल और केरल इन की इस हुसियारी की भुजिया बनाने के लिए लालायित हैं । बाक़ी देश भी मचल रहा है । मोदी को लेकिन होश नहीं है । हुसियारी का नशा सिर चढ़ कर बोल रहा है । फ़िलहाल विश्वनाथ प्रताप सिंह और शरद यादव कैसे बेनाम मौत मरे, लोग जानते हैं । ठीक से ख़बर भी नहीं बन पाए । घुट-घुट कर मरा । शरद यादव तो एक सरकारी घर के लिए नाक रगड़ता रहा । मोदी भी शरद यादव और विश्वनाथ प्रताप सिंह की राह चल पड़ा है । जातीय आग लगा कर गुमनाम मृत्यु की राह पर । सारी विश्व कूटनीति और आर्थिक तरक्की के लोहबान काम नहीं आएंगे । सब धरे रह जायेंगे ।
मोदी के इस कुकर्म को जो अभी नहीं रोका गया तो बहुत गड़बड़ हो जाएगा । यह मोदी बहुत ख़तरनाक खेल खेल रहा है । सरकार बनाने और बचाने के इस खेल में देश को खोखला कर देगा । देश को प्रतिभाहीन कर देगा । देश से डाक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक ख़त्म हो जाएंगे । बेस्ट फ़ेल्योर से कब तक कोई देश चल सकता है ?
अफ़सोस कि ससुरी कांग्रेस के पास जो रीढ़ होती , कायदे का नेता होता तो यह सब इतना एकतरफा नहीं होता । इतना लाचार , लचर , कायर और नपुंसक विपक्ष । राहुल जैसा लतीफ़ा और नशेड़ी नेता प्रतिपक्ष !
अब वोटर जाए कहां ?
राहुल गांधी के पास जाएंगे ? बिल्कुल नहीं । विकल्प नए भी बन सकते हैं और कि बनेंगे ।
साभार:दयानंद पांडेय-(ये लेखक के अपने विचार हैं)