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दिग्विजय सिंह ने UGC के Promotion of Equity को लागू करवा कर मोदी को पटखनी दे दी

-राजकमल गोस्वामी की कलम से-

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Positive India: Rajkamal Goswami:
UGC के नियमों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को ‘भेदभाव से संरक्षण’ वाले दायरे में शामिल करने के पीछे दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

हालिया घटनाक्रमों और ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी’ (Promotion of Equity) रेगुलेशन, 2026 के संदर्भ में स्थिति इस प्रकार है:
दिग्विजय सिंह और संसदीय समिति की भूमिका
• समिति का नेतृत्व: कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ‘शिक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति’ (Parliamentary Standing Committee on Education) के अध्यक्ष हैं।
• सिफारिश: अगस्त 2025 में इस समिति ने संसद में एक रिपोर्ट पेश की थी। इसमें पाया गया कि निजी और सरकारी उच्च शिक्षण संस्थानों में SC, ST और OBC छात्रों का प्रतिनिधित्व उनकी जनसंख्या के अनुपात में बहुत कम है।
• OBC को शामिल करना: समिति ने विशेष रूप से सिफारिश की थी कि यूजीसी को अपने ‘कास्ट डिस्क्रिमिनेशन’ (जातिगत भेदभाव) की परिभाषा में बदलाव करना चाहिए और इसमें OBC छात्रों को भी शामिल करना चाहिए। समिति का तर्क था कि पिछड़ों के साथ होने वाले भेदभाव को भी उतनी ही गंभीरता से लिया जाना चाहिए जितना SC/ST के मामलों को।

• जुर्माने का विरोध: पहले के ड्राफ्ट में झूठी शिकायत करने पर छात्र पर जुर्माना लगाने का प्रावधान था। दिग्विजय सिंह की समिति ने इसे हटाने का सुझाव दिया, ताकि डर के कारण कोई पीड़ित छात्र शिकायत करने से न रुके।

यूजीसी रेगुलेशन 2026 का प्रभाव:
दिग्विजय सिंह की समिति की इन सिफारिशों को आधार बनाकर यूजीसी ने ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026’ तैयार किया है। इसके तहत:
• अब OBC छात्रों को भी SC/ST छात्रों की तरह भेदभाव के खिलाफ सुरक्षा मिलेगी।
• हर कॉलेज में ‘इक्विटी कमेटी’ (Equity Committee) बनाना अनिवार्य होगा, जिसमें SC, ST और OBC समुदायों का प्रतिनिधित्व होगा।
• भेदभाव की शिकायतों के लिए 24/7 हेल्पलाइन और समयबद्ध निवारण प्रणाली लागू की जाएगी।

अनुसूचित जाति जनजाति के साथ ओबीसी को भी मिला देने से सामान्य वर्ग न केवल अल्पसंख्यक हो गया अपितु कॉलेज विश्वविद्यालय में एकदम असुरक्षित महसूस करने लगा । ओबीसी में समाज की सारी दबंग जातियाँ हैं जिनका दबदबा रहता है ।
इस एक कदम ने भाजपा को जो नुकसान पहुँचाया उसकी भरपाई हो पाना संभव नहीं दीखता । ओबीसी का सबसे बड़ा समूह यादव सपा को छोड़ने वाला नहीं है ।अपनी सरकार होने पर समाज में जो रुतबा बढ़ता है उसका एहसास जिसे हो चुका है वह उधर ही जाना चाहेगा ।
ब्राह्मणों पर मायावती ने फिर डोरे डालने शुरू कर दिए हैं । एक बड़ा वोट बैंक उसका भी है और वह मायावती की तरफ झुका तो भाजपा की सीटों में बड़ा डेंट लगना निश्चित है । बस भाजपा योगी को हटाने की गलती और कर दे तो यूपी से साफ़ हो जायेगी । केशव मौर्य इसी कोशिश में लगे हैं ।

साभार:राजकमल गोस्वामी-(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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