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मैरीकॉम ने अपने पति को नकारा बता दिया

-सर्वेश कुमार तिवारी की कलम से-

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Positive India: Sarvesh Kumar Tiwari:
विश्व चैंपियन मैरीकॉम चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने तनिक अलग किस्म की मुक्केबाजी की है। एक इंटरव्यू में अपने पूर्व पति का जिक्र आने पर उन्होंने बड़े ही उग्र तरीके से उसे लगभग नकारा बता दिया है। हालांकि उनका तीन साल पहले तलाक हो चुका है और उनके चारों बच्चे मैरीकॉम के पास ही हैं।

मैरीकॉम के पति मैरीकॉम जितने सफल तो नहीं ही है। पर यह आवश्यक तो नहीं कि पति और पत्नी अपने कैरियर में समान रूप से सफल हों। मैरीकॉम जब सफलता के लिए स्ट्रगल कर रही थीं, तब उनके पति ने घर संभाला, बच्चों को देखा, उनकी सहायता की। वे भी फुटबॉलर थे, पर उन्होंने खेलना छोड़ दिया था। मैरीकॉम पर हुई मीडियाई/सिनेमाई चर्चा में इस बात के लिए उनके पति की खूब बड़ाई भी होती रही है। पर अब मैरीकॉम ही उस बड़ाई को बेकार बताते हुए उन्हें खारिज कर रही हैं।

एक तरफ वैसे लोगों की संख्या बढ़ रही है जो मानते हैं कि पुरुषों को घर के काम करने चाहिए। पत्नी यदि बाहर सफल है तो पति घर का काम संभाले। दूसरी ओर मैरीकॉम जैसी सफल और प्रतिष्ठित महिला घर के काम को काम मानने को ही तैयार नहीं और इसके लिए पति को नेशनल टेलीविजन पर धिक्कार रही है। आदमी किसकी सुने?

हालांकि यहां मैरीकॉम बहुत गलत नहीं हैं। मैरीकॉम की गलती यह है कि उन्होंने घर की बात मीडिया के सामने रखी और उग्र हो गईं। पर यह भी सच है कि पति का न कमाना पत्नी की प्रतिष्ठा गिराता तो है। एक पुरुष यदि अपनी पत्नी के बारे में पूछे जाने पर सहजता से बता सकता है कि वह “गृहिणी” है, पर एक स्त्री यह कहते हुए सहज नहीं रह पाएगी कि पतिदेव घर और बच्चे संभालते हैं। वह जानती है कि ऐसा सुनते ही सुनने वाला अजीब व्यवहार करेगा। उसकी अपनी सफलता छिप जाएगी और पति की असफलता उसकी असफलता बन जाएगी। इसमें कोई संदेह नहीं कि मैरीकॉम को भी ऐसी स्थिति का सामना करना ही पड़ा होगा।

एक फूहड़ सा शो आता है, भाभीजी घर पर हैं? उसके एक नायक हैं विभूति नारायण मिश्रा, छपरा यूनिवर्सिटी टॉपर। विभूति बाबू घर के सारे काम देखते हैं। भोजन बनाना, कपड़े धोना, बर्तन, झाड़ू इत्यादि इत्यादि… पत्नी ग्रूमिंग क्लास चलाती हैं। तो विभूति बाबू को पूरी कॉलोनी और कभी कभी पत्नी भी नल्ला कहती है। वहीं सामने वाले परिवार में मनमोहन तिवारी दुकान चलाते हैं और अंगूरी भाभी घर देखती हैं। पर अंगूरी भाभी को कोई नल्ली नहीं कहता। बात केवल शो की नहीं है, समाज ऐसा ही सोचता है।

तो भाई साहब! पत्नी का सहयोग करना बहुत सुंदर बात है। उसका करियर बनाने में सहयोग करना एक अच्छे पति का गुण है, पर इसके चक्कर में खुद नल्ला रह जाना बहुत बुरा है। क्योंकि आपकी प्रतिष्ठा आपकी अपनी सफलता से ही तय होगी, पत्नी की सफलता से नहीं। और यदि सफल आधुनिक स्त्री पति के नल्ला होने के बाद भी उसका सम्मान करती है तो समझिए कि वह देवी है। पर वैसे उदाहरण अब बहुत कम मिलेंगे। तो नल्ला नहीं बनने का।

कुछ घटनाएं समाज की बंद आंख खोलने के लिए ही घटती हैं।

साभार:सर्वेश तिवारी श्रीमुख-(में लेखक के अपने विचार हैं)
गोपालगंज बिहार।

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