
मोदी जी ने सीज फायर मानकर कटोरे में जीत सजा कर पाकिस्तान को थमा दी।
-पुरुषोत्तम मिश्रा की कलम से-

Positive India: Purshottam Mishra:
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पाकिस्तान की जीत को घोषित कर दिया है। पाकिस्तान की जनता खुशियां मना रही है कि पाकिस्तान जैसे पीददी और आतंकी देश ने भारत की नाक में दम करते हुए भारत को हरा दिया।
और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी क्या कर रहे हैं ? सिर्फ मीटिंग पर मीटिंग, मीटिंग पर मीटिंग। उसके बाद धीरे से Ceasefire को मान गए, वह भी मात्र दो दिन के लड़ाई में। क्या भारत इतना कमजोर है कि पाकिस्तान के सामने दो दिन भी नहीं टिक पाया और सीजफायर को मानने के लिए मजबूर हो गया? ऐसी क्या मजबूरी थी? जो उम्मीदें और उत्साह #ऑपरेशन_सिंदूर(#Operation_Sindoor) से जागी थे, एक झटके में मोदी सरकार ने उसकी बलि दे दी।
एक तरफ तो अमित शाह पार्लियामेंट में सीना ठोकर कह रहे थे कि POK के लिए जान भी दे देंगे और वहीं दूसरी तरफ जब POK को लेने की बारी आई तो मोदी जी ने सीज फायर को मानकर 140 करोड़ भारतवासियों की आकांक्षाओं पर पानी फेर दिया। अब शायद ही कोई भारतवासी पीओके को वापस लेने की बात सोच भी पाएगा।
इस #Ceasefire ने 140 करोड़ भारतीयों को नैराश्य में धकेल दिया है।
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुस्कुराते हुए भारतीयों को यकीन दिला रहे थे की चिंता मत करिए उम्मीद से बेहतर रिजल्ट देंगे यहां तो मोदी जी ने भारतीयों की उम्मीद पर पानी फेर दिया इस सीजफायर को मानकर । हद तो तब हो गए जब पाकिस्तान ने सीजफायर के बाद भी भारतीय सीमा पर भारी गोलाबारी की, ड्रोन भेजें। उसके बाद भी मोदी सरकार की आंखें नहीं खुली और एक सख्त संदेश देने के साथ सीजफायर पर अमल चालू हो गया। यह भी गजब है।
इतिहास इसको भी याद रखेगा की जीते हुए युद्ध को कोई भारतीय प्रधानमंत्री कैसे हार में तब्दील कर देता है और उस जीत को तस्तरी में सजा कर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को भेंट कर देता है।
जिस तरह से पाकिस्तान इस जीत का जश्न मना रहा है उसे तो यही लगता है कि पाकिस्तान के डीजीएमओ ने सीजफायर के लिए अप्रोच नहीं किया , बल्कि भारत के डीजीएमओ ने सीजफायर के लिए अप्रोच किया होगा।