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हरमंदिर साहब में योग करने पर सिखों की भावनाएँ क्यों भड़क जाती हैं?

-राजकमल गोस्वामी की कलम से-

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Positive India:Rajkamal Goswami:
जिस हरमंदिर साहब(Golden Temple) में नमाज़ पढ़ने से सिख मुस्लिम एकता मजबूत होती है उसी हरमंदिर साहब में योग करने पर सिखों की भावनाएँ भड़क जाती हैं ़ बेअदबी हो जाती है और एफ आई आर करा दी जाती है ।

यह कौन सी मनोदशा है इसका विश्लेषण करना पड़ेगा । मुसलमानों ने डाइरेक्ट एक्शन डे मना कर सड़कों पर हिंदुओं की लाशें बिछा कर पाकिस्तान ले लिया मगर सिख अपना अलग धार्मिक देश नहीं बना पाये इसका सिखों के एक तबके को भारी मलाल है । खालिस्तान बनाने का उन्हें एक ही रास्ता दिखाई देता है कि हिंदू एक कमज़ोर कड़ी है इस पर वार करो तभी खालिस्तान बन सकता है । भिंडरावाले ने यही रास्ता चुना । बसों से उतार उतार कर हिंदुओं की हत्या की गई । जो इस तरह की हत्याओं के विरोधी सिख थे उनकी भी हत्या की गई ।

कट्टरवादी यह बात भूल जाते हैं कि जब मुस्लिम लीग ने डाइरेक्ट एक्शन डे मनाया था तब मुल्क में अंग्रेज़ों का निज़ाम था और बंगाल में जिन्ना का दाहिना हाथ हुसैन शहीद सोहरावर्दी सत्तासीन था इसलिए डाइरेक्ट ऐक्शन डे बंगाल में सफल हो सका । अगर सुहरावर्दी नहीं होता तो दंगाइयों को मार मार कर भूत बना दिया जाता ।

आज निॹाम दूसरा है , अंग्रेज कब के चले गये । विभाजनकारी ताकतों से भारत की केंद्रीय सत्ता सख़्ती से निपटने का माद्दा रखती है । अलगाववादियो का कोई मंसूबा पूरा होने वाला नहीं है ।

साभार:राजकमल गोस्वामी-(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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